रांगेय राघव : एक अंतरंग परिचय

सुलोचना रांगेय राघव

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एक रचनाकार की कल्पना और विचारों से प्रायः हम उनकी कृतियों के माध्यम से हम परिचय प्राप्त कर लेते हैं, फिर भी क ई बार हमारी इच्छा उनके अंतरंग जीवन को जानने की बनी रहती है कि किन क्षणों में कोई लेखक अपने शब्दों के अंधेरे को लांघकर कागज़ पर अपनी रचना को मूर्त करता है, किस तरह अपने घर परिवार के साथ रहते हुए लिखता पढ़ता है । लेखक के जीवन और रचनात्मक ऊहापोहों अगर को सहचरी कलमबद्ध करती है तो उसकी प्रामाणिकता बढ़ जाती है और उसका महत्त्व असीम हो जाता है । रांगेय राघव : एक अंतरंग परिचय  एक ऐसी ही कृति है जिसमें हिंदी के महान लेखक रांगेय राघव‌ के जीवन संघर्षों और जिजीविषा के बारे में उनकी जीवन संगिनी सुलोचना रांगेय राघव‌ ने बेहद संवेदनशीलता और आत्मीयता से दर्ज़ किया है । इसमें एक पत्नी ने अपने कृतिकार पति के साथ जिये हुए अमूल्य पलों को ही मार्मिकता से व्यक्त नहीं किया है बल्कि एक मनुष्य के रूप में रांगेय राघव की सहृदयता और मानवीयता का आकलन अत्यंत वस्तुनिष्ठता और निस्पृहता से किया है । सुलोचना जी स्वयं एक अच्छी रचनाकार हैं। अपने मोहक और तरल गद्य में जहां उन्होंने एक ओर रांगेय राघव के गृहस्थ  जीवन के रोचक चित्र उकेरे हैं, वहीं दूसरी ओर रांगेय राघव‌ सरीखे विपुल और विविधवर्णी कृतिकार के संपूर्ण सार तत्त्व का सामाजिक और ऐतिहासिक आकलन भी करने की कोशिश की है । इस कृति रांगेय राघव : एक अंतरंग परिचय  को पढ़ना रांगेय राघव को सिर्फ़ उनकी विदुषी पत्नी की आंख से निकट से जानना  - समझना भर नहीं है, स्वयं सुलोचना रांगेय राघव‌ के उस पक्ष से परिचित होना भी है जिनके संग-साथ और संवाद से रांगेय राघव जैसे कालजयी लेखक अपना रचना कर्म अबाध रूप से संभव कर पाते हैं ।

-विनोद दास  (कवि, कथाकार, फ़िल्म आलोचक)

लेखिका के बारे में 

सुलोचना रांगेय राघव

31 जुलाई 1936 को जूनागढ़ (गुजरात) में एक दाक्षिणात्य आयंगार परिवार में जन्म । प्रारंभिक शिक्षा बोर्डी (ज़िला ठाणे, महाराष्ट्र) और बम्बई (मुंबई), महाराष्ट्र में । स्नातक, स्नातकोत्तर अध्ययन के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय से हिन्दी उपन्यासों का समाजशास्त्रीय अध्ययन विषय पर पीएच.डी । साहित्य और समाजशास्त्र दोनों विषयों की गंभीर अध्येता ।

7 मई 1956 को रांगेय राघव से विवाह । 8 फ़रवरी 1960 को पुत्री सीमन्तिनी का जन्म |

1964 से राजस्थान विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के अध्यापन के बाद 1996 में एसोसियेट प्रोफ़ेसर के रूप में सेवानिवृत्ति । हिन्दी, अंग्रेज़ी के अतिरिक्त गुजराती, मराठी तथा तमिळ भाषाओं पर अधिकार। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित । अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और फ्रांस आदि देशों की यात्रा।

2023 में राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा अमृत सम्मान से सम्मानित ।

प्रकाशित पुस्तकें :

पुनः (रांगेय राघव के अंतरंग जीवन पर संस्मरण),

द सोश्योलॉजी ऑफ़ इंडियन लिट्रेचर ( अ सोश्योलॉजिकल स्टडी ऑफ़ हिन्दी नॉवल्स) (शोधकार्य),

रांगेय राघव ग्रंथावली (दस भाग, सम्पादन), रांगेय राघव : एक अंतरंग परिचय (संस्मरण),

बारी-बारणा खोल दो (उपन्यास)

978-81-968652-2-1

With photographs, illustrations and Rangeya Raghava's paintings.